यात्रा विशेष

दिल्ली में स्थित मुग़ल कालीन प्रसिद्ध इमारतें

हमारे देश में बहुत सी ऐतिहासिक मुग़ल कालीन प्रसिद्ध इमारतें है जिंतनी आकर्षक मुग़ल इमारते देखने में है उतना ही जिज्ञासापूर्ण है मुगलो का इतिहास|  आज आपको दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतों के बारे में बताते है ताकि जब भी आप दिल्ली आये तो इन्हे देखना न भूले

मुग़ल कालीन प्रसिद्ध इमारतें

हुमायूँ का मकबरा

मुग़ल शासक हुमायु का मकबरा उनकी मृत्यु के 9 साल बाद बनवाया गया था हुमायूँ की मृत्यु 1556 में हुई थी उनकी बेगम हमीदा बानो  के आदेश से  1562 में यह मकबरा बनाया गया था। पहली बार लाल बलुआ पत्थर का इस्तेमाल इसी मकबरे को बनाने के लिए किया गया था मकबरा  पुराना किला के नजदीक दिल्ली के निजामुद्दीन ईस्ट में स्थापित है। हुमांयू का मकबरा यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल है  यह मकबरा मुग़ल और फ़ारसी वास्तुकला का बेहतरीन नमूना हैहुमायूँ का मकबरा घूमने की जानकारी - Humayun's Tomb Information In Hindi

लाल किला

सन 1639 में मुगल बादशाह शाहजहाँ द्वारा यह किला बनवाया गया था लाल पत्थर से बना होने के कारण इसे लाल किला नाम दिया गया किले  में दो गेट है दिल्ली गेट और दूसरा लाहौर गेट। लाहौर गेट किले का मुख्य प्रवेश द्वार है। किले के अंदर एक  मस्जिद भी है जिसे लाल किले के निर्माण के बाद बनाया गया था 1659 में बनाई इस मस्जिद को मोती मस्जिद के नाम से जाना जाता है मोती मस्जिद सफ़ेद संगमरमर के पत्थर से निर्मित है हर साल गणतंत्र दिवस पर तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले में ही ध्वजारोहण कराया जाता हैRed Fort (Lal Qila) Delhi India - History of Red Fort (Lal Qila)

सफदरजंग का मकबरा

सफदरजंग का मकबरा श्री ओरबिंदो मार्ग पर स्थित है  यह मकबरा 1753 में नवाब शुजा उद दौला द्वारा  अपने पिता सफदरजंग की याद में बनवाया  था ईमारत का सबसे बड़ा गुम्बद  सफ़ेद संगमरमर के पत्थर से बना है बाकि ईमारत  लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है मकबरे की  विशाल दीवारें, लम्बे फव्वारे, मुग़ल गार्डन  मुग़ल शैली  का खूबसूरत नमूना है मकबरे के अंदर सफदरजंग और उनकी बेगम के कब्र है यह मुग़ल सल्तनत का आखिरी मकबरा हैसफदरजंग के मकबरे के बारे में रोचक तथ्य। Safdar Jang Tomb Interesting Facts in Hindi

 क़ुतुब मीनार

कुतुब मीनार का निर्माण 1193 में दिल्ली के पहले मुस्लिम शासक, ममलुक राजवंश के कुतुब-उद-दीन ऐबक द्वारा किया गया था यह 73 मीटर लंबा है और आधार पर 15 मीटर का व्यास और शीर्ष पर 2.5 मीटर है। इसका निर्माण ऐबक ने प्रसिद्ध सूफी संत कुतबुद्दीन बख्तियार काकी के सम्मान के लिए किया था। यह  लाल पत्थर और मार्बल से बनी हुई है मीनार के अंदर गोल सीढ़ियाँ है, ऊँचाई तक कुल 379 सीढ़ियाँ है यह मीनार युनेस्को विश्व धरोहर घोषित है। है। क़ुतुब मीनार के पास क़ुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद है

पुराना किला

पुराना किला दिल्ली के प्रगति मैदान के नजदीक है 1539 के चौसा युद्ध में जब शेरशाह सूरी ने मुग़ल शासक  हुमायुँ को हराया था तो उसी जीत की ख़ुशी में  शेरशाह सूरी ने पुराने किले का निर्माण कराया |

कहते है पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ  इसी स्थान पर थी जहाँ आज पुराना किला स्थापित है

पुराना किला मुगल वास्तुकला पर आधारित है और यहाँ आपको मुग़ल शैली की नकाशी भी देखने को मिलेगी किले के अंदर लगे पेड़ पौधे और फूलो के  बगीचे उसकी खूबसूरती को और भी बढ़ा देते है जब भी आप पुराना किला देखने जायेगे तो आप दिल्ली का चिड़िया घर भी देख पाएंगे पुराने किले के पास ही चिड़िया घर है.

तो ये रहीं कुछ मुग़ल कालीन प्रसिद्ध इमारतें |

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