काव्य

मेरे पापा मेरे लिए मेरी पूरी दुनिया

जब आखें खुली उनकी गोद मे,

हमें पता भी नहीं था,

कि कौन सा रिश्ता है इनके साथ हमारा।

पर एहसास बड़ा प्यारा सा था इस रिश्ते का।

जब थोड़ी सी बड़ी हुई इस रिश्ते को नाम मिला पापा।

मेरी पुरी दुनिया इस नाम के आगे सिमट कर रह गयी।

मेरे सबसे पहले और सच्चे दोस्त रहे हैं मेरे पापा।

मेरे लाइफ के सुपर हीरो,मेरा पहला प्यार हैं मेरे पापा।

जब रातों को नींद ना आती,

वो कही गई कहानियां आज भी याद है हमें।

याद हैं हमारा आपकी गोद मे सोना।

उनका हमारा बाल बनाना।

वो मीठी सी प्यारी सी बातें हमारी।

वो जीद करना हमारा।

छोटी छोटी बातों मे उनसे लड़ना हमारा।

हमारी गलतियों से उन्होंने सहीं गलत की पहचान करायी।

दुनिया में प्यार से जाने का सलीका भी सिखाया।

उनकी उंगली थाम कर चलना,

हमें आज भी प्यारा लगता हैं।

ऐसा अनमोल सा हैं ये रिश्ता हमारा।

आज भी हमारे दूर जाने की बातों से,

आती हैं भर उनकी आँखें।

दूर नहीं करना चाहते है अपनी नजरों से हमें।

पर इस दुनिया के दस्तूर के आगे,

उन्हें भी झुकना पड़ता हैं।

और हमें अपने से दूर भेजने का,

ख्याल मन मे लाना पड़ता हैं।

दूर जाने के बाद भी,

हमारा रिश्ता यूहीं रहने वाला है।

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