काव्य

क्योंकि ख्वाबों से निकलकर मंजिलों तक पहुंचने के लिए भटकना जरुरी है..

क्योंकि ख्वाबों से निकलकर मंजिलों तक पहुंचने के लिए भटकना जरुरी है.. क्यों अपने ख्वाबों को मौका नहीं देते हो? दो-चार असफलताओं के बाद क्यों निराश हो जाते हो? क्यों ये सोचते हो कि तुम्हारी कहानी खत्म हो गयी? कहानियाँ तब खत्म होती है, जब कहानियाँ शुरु होती है। अपने सफर पर निकलो। kअपनी मंजिल […]

काव्य

मेरे पापा मेरे लिए मेरी पूरी दुनिया

जब आखें खुली उनकी गोद मे, हमें पता भी नहीं था, कि कौन सा रिश्ता है इनके साथ हमारा। पर एहसास बड़ा प्यारा सा था इस रिश्ते का। जब थोड़ी सी बड़ी हुई इस रिश्ते को नाम मिला पापा। मेरी पुरी दुनिया इस नाम के आगे सिमट कर रह गयी। मेरे सबसे पहले और सच्चे […]